Friday, February 12, 2010

महाशिवरात्रि पर लाखो शिव भक्तो ने किया महादेवा में पौराणिक शिवलिंग का जलाभिषेक

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बाराबंकी / प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर लगने वाले महादेवा मेले में देश भर से लाखो कावारिया बम भोले का जयकारा लगाते हुए शिव लिंग का जलाभिषेक करने आते हैं / रामनगर तहसील में स्थित पांडव कालीन लोधेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना पांडवो ने अज्ञातवास के दौरान की थी,फाल्गुन का मेला यहाँ खास अहमियत रखता है,पूरे देश से लाखो श्रद्धालू यहाँ कावर लेकर शिव रात्रि या शिरात्रि से पूर्व पहुच कर शिवलिंग पर जल चढाते हैं,माना जाता है की वेद व्यास मुनि की प्रेरणा से पांडवो ने रूद्र महायज्ञ का आयोजन किया और तत्कालीन गंडक इस समय घाघरा नदी के किनारे कुल्छात्तर नमक जगह पर इस यज्ञ का आयोजन किया गया,महादेवा से २ किलोमीटर उत्तर नदी के पास आज भी कुल्छात्तर में यज्ञ कुंड के प्राचीन निशान मौजूद हैं उसी दौरान इस शिवलिंग की स्थापना पांडवो ने की थी |
इस पूरे इलाके में पांडव कालीन अवशेष बिखरे पड़े हैं जिस समय पांडव यहाँ छुपे थे बाराबंकी को बराह वन कहा जाता था और यहाँ घने और विशाल जंगल थे |वेर्शो पांडव यहाँ छुपे रहे और इसी दौरान उन्होंने रामनगर से सटी सिरौली गौसपुर इलाके में पारिजात ब्रक्ष को लगाया और गंगा दसहरा के दौरान खिलने वाले सुनहरे फूलो से भगवन शिव की आराधना की,विष्णु पुराण में उल्लेख है की इस पारिजात वृक्ष को भगवन कृष्ण स्वर्ग से लाये थे और अर्जुन ने अपने बाण से पाताल में छिद्र कर इसे स्थापित किया था |
ऐसे महान महादेवा परीछेत्र के दर्शन कर श्रद्धालू अपने को धन्य समझते हैं |
इतने महत्वो के बाद इस मेला छेत्र में अव्यवस्था इस हद तक हावी है की सुविधा के नाम पर यहाँ पीने का साफ़ पानी भी मुश्किल से मिल पाता है,जिला प्रशासन ने महा शिवरात्रि के इस फाल्गुनी मेले में श्र्धालुवो के लिए बेहतर इनजाम किये हैं
----रिपोर्टर -दीपक निर्भय , विशेष संवादाता विशेष संवादाता
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