Thursday, February 11, 2010

यश, वैभव व मोक्ष दायिनी है महाशिवरात्रि

shiva


पं. ब्रजेश शुक्ल ने बताया शिवरात्रि उपासना का विधि विधान
इटावाः पं.ब्रजेश शुक्ल ने परम पुनीत महाशिवरात्रि की कल्याणमयी महिला का मार्मिक वखान किया। श्रृद्धालुओं को संबोधित करते हुए षिव भक्त पं. ब्रजेश शुक्ल ने कहा कि महाशिवरात्रि पर की जाने वाली भगवान नीलकंठ सदाशिव की व्रतोयासना तत्काल यश वैभव और मोक्ष प्रदान करने वाली है। उन्होंने कहा कि केवल भाव के भूखे भोलेनाथ सच्चे मन से स्मरण करने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
श्री शुक्ल ने कहा कि सभी धर्मों के मानव जीवन में जन्म और मृत्यु का विषेश स्थान है महाशिवरात्रि को भगवान सदाशिव के प्रकट की रात्रि शास्त्र बताते है। इसी रात्रि को एक महाज्योर्तिलिंग के स्वरुप में प्रकट होकर भगवान विश्णुजी और ब्रह्मा जी को स्वसुरुप में भगवान शिव ने दर्शन दिये भगवान का स्वरुप उस समय अग्नि जैसा प्रतीत हो रहा था उसी अग्नि पिण्ड में दस भुजा पंचमुख, प्रत्येक मुख में तीन तीन नेत्र, त्रिषूल, चक्र, गदा आदि शस्त्र हाथों में थे। इनके रंग कपूर के समान गोरा मस्तक पर अर्धचंद्र और सूर्य से भी अधिक प्रकाश शरिर से निकल रहा था। इनके तेज को भगवान विश्णु और ब्रह्मा भी सहन करने में असर्मथ हो रहे थे। इनके मुख से ओम की ध्वनि उस समय निकल रही थीं महाशिवरात्रि को ओम का जन्म हुआ ही माना जायेगा।
धर्मषास्त्रों ने ओम को शब्द ब्रह्म प्रणव रुप में स्वीकार किया गया है। बगैर प्रणव ‘‘ ओम’’ के सभी मंत्र अधूरे ही रह जाते है क्योंकि ओम शब्द ब्रह्म है ब्रह्म को मंत्र से निकाल दीजिये तो मंत्र केवल शब्द मात्र रह जाता है मंत्र पूर्ण नहीं माना जाता। महाशिवरात्रि को ही भगवान विश्णु और ब्रह्मा जी को शब्द ब्रह्म ओम का उपदेश दिया और जप का आदेश दिया इसी कारण भगवान विश्णु और पितामह ब्रह्मा जी के गुरु भगवान शिव हुये।
इसी कारण से हम भक्तों के जीवन में महाशिवरात्रि एक विषेश महत्वपूर्ण स्थान रखती है। महाशिवरात्रि को तेरस के दिन चैदस की रात्रि को मनाया जाता है। भगवान शिव का पूजन इस दिन चारों पहर में लिंग रूप और साकार रूप में किया जाता है। आज के दिन विषेश रूप से शिव का वास है और आज के दिन भगवान अनेकों भक्तों को दर्षन देकर कल्याण करते आये हैं। जिन भक्तों ने गुरु कर लिये हैं वो गुरु के निर्देषन में पूजन जाप करें। जो गुरु नहीं कर सकें हैं वे भक्त ओम या शिव के पंचाक्षरी ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र ही करें अन्य मंत्र का जाप न करने का षास्त्रों में उल्लेख हैं पूजा का विधि-प्रथम पहर में गंध पुश्प और दूध, दही, घृत, शक्कर, शहद शिव के आठ नाम से भव, षर्व,रुद्र, पषुपति, उग्र, महान, भीम और ईषान नाम के आगे श्री और नाम के पीछे श्री भवाय नमः लगायें जल चढ़ाते हैं। दूसरे पहल में बेलपत्रों के साथ बिजोंरा, नीबू का अर्क, काले तिल, जौ चढ़ाये। चावल की खीर का भोग फिर जब तक मन लगे जाप करें। तीसरे पहर में जौ के साथ गेहूं चढ़ाये। पूजा ऊपर की विधि से ही करें। पुए का भोग लगायें कपूर की आरती करे । अनार का अर्क चढ़ायें फिर जाप करें चैथे पहर में केला सप्तधान और मिठाई के साथ उड़द के बडे़ चढ़ायें और जाप करें चारों पहरों में बेलपत्र और जल अवष्य चढ़ायें जाप करें। हर पहर की पूजा हटाकर ही नये पहर की पूजा की जाती है यदि इस विधि को करने में असमर्थ हों तो।
बेलपत्र जल ओर श्रद्धा अनुसार भगवान का भोग लगायें। देशी घी का दीपक जलायें जलायें दण्डवत प्रणाम करें। आसन पर बैठकर उच्च स्तर में ओम या ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप जब तक मन लगे करें। अंत में कपूर की आरती करें आरती के बाद भूलों की क्षमा मांगे। महाशिवरात्रि समस्त जन्मों के पापों को भस्म करने की षक्ति रखती है। ओम अपने आप में एक बहुत बड़ा चमत्कार है यह शिवरात्रि को विषेश प्रभावशाली हो जाता है।
विशेषः महाशिवरात्रि के दिन किए जाने वाले उपाय महत्वपूर्ण व शीघ्र फलदायी होते हैं। इस दिन भोलेनाथ प्रसन्न हो वरदान अवश्य देते हैं। इसके महत्व को समझते हुए भोलेनाथ की कृपा से समस्याओं से निजात हासिल की जा सकती है।


कोई भी प्रयोग महाशिवरात्रि के दिन, किसी भी समय कर सकते हैं। मुंह उत्तर/पूर्व की ओर करके पूजा स्थान पर बैठें। ऊन का आसन होना चाहिए। लकड़ी की चौकी पर लाल सूती वस्त्र बिछाना चाहिए। दूसरी चौकी पर शिव परिवार का चित्र/ शिव यंत्र व थाली में चंदन से बड़ा ú बनाकर अवश्य रखें। ú के मध्य में यंत्र या प्रतिमा रखें। पुष्प, माला, मौली, बेलपत्र, धतूरा अवश्य रखें। चंदन केसर मिश्रित जल से यंत्र/प्रतिमा का अभिषेक कर स्वच्छ जल से धोकर स्वच्छ कपड़े से पोंछ कर स्थापित करना चाहिए।


भाग्यवृद्धि के लिए


* किसी गहरे पात्र में पारद शिवलिंग स्थापित करें। पात्र को सफेद वस्त्र पर स्थापित करें। ú हृीं नम: शिवाय हृीं ú मंत्र का ठीक आधे घंटे तक जाप करते हुए जलधारा पारद शिवलिंग पर अर्पित करें। अर्पित जल को बाद में किसी पवित्र वृक्ष की जड़ में डाल दें। शिवलिंग पूजा स्थान में स्थापित करें और नित्य नियम से मंत्र का जाप करें।

FOR MORE VISIT WWW.INBMEDIA.COM

सपा के बदलते परिपेक्ष में अखिलेश यादव से साक्षात्कार

केन्द्र की राजनीति में उप्र का अहम रोल माना जाता है. दूसरी तरफ यह बात भी उभर कर आई है कि प्रदेश में छोटे दल ज्यादा प्रभावी होते जा रहे हैं. इन सब के बीच एक बात और है जो इन छोटी पार्टियों को एक साथ करती है. वो है युवा नेतृत्व के रुप में ज्यादातर पार्टियों में ऐसे चेहरों का सामने आना जो शीर्ष पर बैठे नेताओं के लड़के या संबंधी हैं. वैसे तो यह परंपरा कांग्रेस पार्टी की थी लेकिन अब इस परंपरा का अनुसरण छोटी पार्टियां भी कर रही हैं.
    पिछले कुछ दिनों में समाजवादी पार्टी ने इस परंपरा का सबसे ज्यादा अनुसरण किया है. पहले मुलायम सिंह ने अपने छोटे भाई शिवपाल यादव को सदन के विपक्षी दल का नेता बना दिया और अब अपने बेटे अखिलेश यादव को प्रदेश का अध्यक्ष बना दिया. अखिलेश यादव पिछले चुनाव में कन्नौज व फिरोजाबाद से सांसद चुने गए थे. श्री यादव ने इतने कम समय में कुछ और सीखा हो या नहीं लेकिन शब्दों की जलेबी छानना जरुर सीख गए हैं. पिछ्ले दिनों लखनऊ के हमारे ब्यूरो चीफ विनय गोयल ने श्री यादव से बात की. पेश है बातचीत के मुख्य अंश:-


    सवाल-आपको प्रदेश का मुखिया बने कुछ समय हो चुका है. किन मुद्दों को आपने अपनी प्राथमिकता में रखा है.
    अखिलेश यादवः प्रदेश में आज युवाओं के सामने काफी चुनौतियां हैं. युवाओं को सही दिशा में ले जाना ही पार्टी का प्रथम लक्ष्य है. युवाओं की उर्जाका सही दिशा में इस्तेमाल कर पार्टी को संगठित करना भी हमारी प्राथमिकता में है.


    सवाल-प्रदेश में पार्टी की छवि को आपने किस तरह निर्मल बनाने की नीति तैयार की है?
    अखिलेश यादवः पार्टी की छवि में कोई गिरावट आई ही नहीं है. हम पहले से और अधिक मजबूत हुए हैं. वोटों का आधार भी पहले से बेहतर हुआ है.

    सवाल-लेकिन हालिया विधान परिषद चुनाव के परिणाम तो कुछ और ही कहानी बयां कर रही है?
    अखिलेश यादवः प्रदेश की माया सरकार ने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर ग्राम प्रधानों को मजबूर कर दिया बसपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान को. अगर निष्पक्ष मतदान कराया जाता तो हालत इतने बुरे भी न होते.

    सवाल-लोकसभा चुनाव में भी पुरानी सीटों को नहीं बचा सकी पार्टी, ऐसा क्यों हुआ?
    अखिलेश यादवः आपका सवाल बिल्कुल जायज है और जवाब भी उतना हीजायज़ दूंगा. सरकार ने साम-दाम-दंड सभी नीतियों का प्रयोग कर प्रदेश में अपने प्रत्याशियोंको जिताने का प्रयास किया लेकिन उनका भी कोई खास फायदा नहीं हुआ. कांग्रेस को भले हीतात्कालिक फायदा हुआ.

    सवाल-अमर सिंह के मामले में आप क्या कहना चाहेंगे?
    अखिलेश यादवः अमर सिंह जी से हमारे पारिवारिक संबंध काफी समय से हैं. सब कुछ सामान्य व ठीक ठाक चल रहा है. वैसे भी यह मामला सपा प्रमुख और अन्य वरिष्ठों के बीच का है. इस मामले में मेरी राय का कोई महत्व नहीं है.

    सवाल-अमर सिंह के निष्कासन से पार्टी को कितना फायदा या नुकसान होने का अनुमान है.
    अखिलेश यादवः इस मामले के बारे में पार्टी अपनी राष्ट्रीय बैठक में विचार करेगी और जो भी फैसला होगा वो सर्वमान्य होगा. कोई भी पार्टी से ऊपर नहीं है.

    सवाल-फिरोजाबाद संसदीय सीट पर आपका घरेलू प्रत्याशी हार गया. आप इस हार की क्या वजह देखते हैं?
    अखिलेश यादवः इस हार के लिए मैं अपने आपको पूरी तरह से जिम्मेदार मानता हूं. मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता.
...........सौजन्य सेः जी. एन. एन.
Bookmark and Share